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येशू मसीह प्रभू है | प्रभु यीशु का अनमोल वचन | आत्मिक मान्ना Jesus message

येशू मसीह प्रभू है | प्रभु यीशु का अनमोल वचन | आत्मिक मान्ना ( Jesus Vachan )



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येशू मसीह प्रभू है | प्रभु यीशु का अनमोल वचन | आत्मिक मान्ना 

येशू मसीह प्रभू है

मेरे प्रिय मित्रों हम यीशु मसीह प्रभु यीशु मसीह कहते हैं रोमियो के अध्याय 10 उसके वाक्य 9 मे  संत पॉलस कहते हैं यदि आप अपने मुख से स्वीकार करते हैं की यीशु प्रभु है और हृदय से विश्वास करते हैं  की परमेश्वर ने उन्हें मृतकों में से जीलाया तो आपको मुक्ती मिलेगी। एक बहुत ही अच्छा वचन है संत पॉलस कहते हैं यदि आप मुख से स्वीकार करते हैं कि यीशु प्रभु है और हृदय से विश्वास करते हैं कि पिता परमेश्वर ने उन्हें मृतकों में से जीलाया है तो आपको मुक्ती मिलेगी। 

यीशु मरने के बाद भी पुनः जी उठे

हम योहान के सुसमाचार के अध्याय 20 में पढ़ते उसके वचन 19 मे प्रभु यीशु की मृत्यु के बाद उनके मुख्य शिष्य प्रेरित डर के मारे एक कमरे में बंद पड़े हुए थे। उन्हे डर था। भविष्य के बारे मे बहुत ज्यादा ही चिंता थी। एक कमरे में बंद करेंगे थे लेकिन सुसमाचार हमे बताता है कि प्रभु यीशु मसीह महिमा के साथ तीसरे दिन मृतकों से पुनर्जीवित होने के बाद उस बंद कमरे में प्रवेश करते हैं और उनसे कहते हैं शांति मिली लेकिन इस बार उस कमरे में उनके 12 शिष्यों में से एक थॉमस नहीं थे। और इसिलीये शिष्यों ने थॉमस से बाद में कहा कि हमने प्रभु यीशु को देखा है। थॉमस ने कहा जब तक में उनके हाथों में किलो का निशान ना देखूं और अपनी उंगली उसमे ना डालु और उनके के बगल में अपना हाथ ना डालु तब तक मैं विश्वास नहीं करूंगा। वचन हमे बताता है कि आठ दिनों के बाद यीशु मसीह फिर एक बार अपने शिष्यों को दर्शन देते हैं। और उस समय थॉमस उनके बीच में था येशू ने थॉमस से कहा मेरे पास आओ अपनी उंगली मेरे घावो मे डालो। अपने हाथ को मेरे बगल में डालो। अविश्वासी मत बनो विश्वासी बनो। अब तुरंत थॉमस पुकारता है "हे मेरे ईश्वर हे मेरे प्रभु" थॉमस की प्रतिक्रिया का कारण है, थॉमस और अन्य शिष्यो ने नाझरेथ निवासी यीशु को एक महान गुरु ही समझ रखा था। एक चमत्कारी गुरू ईश्वर की ओर से भेजे महान व्यक्ति, महापुरुष और इसी लिये प्रभू यीशु की मृत्यु के बाद उनके मन में तनिक भी आशा नहीं थी कि वह पुनर्जीवित हो जाएगा।  इसिलीये समाचारों में हम पाएंगे कि प्रभू येशू मसीह पुनरुत्थान के बाद अपने शिष्यों को दर्शन देते है उनके अंदर संदेह बना हुआ था। इस बात पर विश्वास करने को तैयार नहीं  थे की येशू मसीह जीवित है। क्योंकि उन्होंने यीशु मसीह को एक महान व्यक्ति एक महापुरुष के रूप में ही देखा था। पुनर्जीवित देखने के बाद उनके अंदर एक नया विश्वास जगता है वह यह है की यीशु प्रभू है और वही ईश्वर है। मृत्यू को हराने वाला ईश्वर मृत्यू पर जित पाने वाला प्रभू है। और इसीलिए प्रभु यीशु को प्रभु मानने लगे।

ईश्वर ने यीशु को प्रभु और मसीह बना दिया

प्रेरित के अध्याय 2 वचन 36 पेत्रस सबके सामने घोषित करता है की प्रभु यीशु के शिष्य तंत कोष के त्यौहार के दिन पवित्र आत्मा से भर जाने के बाद ईश्वर की स्तुति करने लगे और उनको सुनने और देखने वाले सोचने लगे कि यह शराब पी रखे हैं और वहां पर पेत्रस पहली बार सुसमाचार की घोषणा करता है वचन 36 में पेत्रस कहता है समस्त इस्रायली घराना यह जान ले कि आपने जिन्हें क्रूस पर चढ़ाया था उन्हें ईश्वर ने प्रभु और मसीह बना दिया प्रभु यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा यीशु प्रभु बने मसीह बने इसके बारे में सुंदर वर्णन हमें फिलिपीयों के अध्याय 2 वचन 6 से 11 तक पॉलस कहते हैं इस प्रभु बनने या बनाए जाने की प्रक्रिया के बारे में संत पॉलस कहते हैं वह ईश्वर थे उन्होंने ईश्वर की बराबरी करने का अधिकार था लेकिन उन्होंने अपने को दास के रूप में बनाया और मनुष्य का रूप धारण करके अपने को भी दिन हीन बना दिया इतना ही नहीं मनुष्य का रूप धारण करके मरण तक वह आज्ञाकारी बनी इसलिए ईश्वर ने उन्हें महान बनाया और वह भी नाम प्रदान किया जो सर्व नाम में में श्रेष्ठ है। जिसे आकाश पृथ्वी अधोलोक के सभी निवासी घुटने टेके और पिता की महिमा के लिए घोषित करें की यीशु ही प्रभु है।

यीशु मसीह अल्फ़ा और ओमेगा है। 

एक बहुत ही सुंदर वर्णन है की यीशु कैसे प्रभु बने यीशु ईश्वर के पुत्र थे और वो मनुष्य बने। अपने को दिन बनाए। और इतना ही नहीं एक शर्मनाक मृत्यु एक दर्दनाक मृत्यु स्वीकार किया और ईश्वर की आज्ञा का पूर्णता पालन किया इसीलिए ईश्वर  ने पुनः उन्हें प्रभु बनाया सारी सृष्टि का प्रभाव बनाया समस्त मानव जाति का प्रभु मानव इतिहास का प्रभु हर विश्वासी का प्रभाव बनाया। हम प्रकाशना के अध्याय 19 और वचन 16 में पढ़ते हैं कि उनके जांघ पर पर और वस्त्र पर लिखा हुआ था राजाओं का राजा प्रभु का प्रभु यीशु राजाओं का राजा है और प्रभु का प्रभु यीशु प्रभु है। मत्ती अध्याय 28 वचन 18 मे प्रभु यीशु कहते हैं स्वर्ग में और पृथ्वी पर पूरा देख कर मुझे मिला है स्वर्ग और पृथ्वी पर पूरा अधिकार मुझे मिला है। प्रकाशना अध्याय 22 वचन 13 में हम पढ़ते हैं प्रभु यीशु कहते हैं अल्फा और ओमेगा आदि और अंत मै हू। प्रभु यीशु अल्फा और ओमेगा है आदि और अंत है। प्रकाशना अध्याय 1 वचन 18 और 19 में हम पढ़ते हैं "डरो नहीं आदि और अंत में हूं जीवन का स्रोत में हुं देखो मैं मर गया था मैं अनंत काल तक जीवित हूं। संत पॉलस कहते हैं उस येशु को जो प्रभु के रुप में स्वीकार करता है उस यीशु को जो मनुष्य करोगे धारण किया हमारी मुक्ति के लिए मृत्यु को स्वीकार किया और मरने के बाद तीसरे दिन मृतकों से फिर से जी उठा। और इस प्रकार ईश्वर के द्वारा जो संसार समस्त सृष्टि और समस्त मानव इतिहास का प्रभु जो बनाया गया है वैसे जो प्रभु के रूप में स्वीकार करता है उसे मुक्ति मिलेगी। लेकिन वही संत पॉलस कहते हैं। पहले कुरंथी अध्याय 12 वचन 3 "कोई भी पवित्र आत्मा की शक्ति के बिना यीशु प्रभु के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता है" यीशु को जानने के लिए पवित्र आत्मा की विशेष ज्योती की जरूरत होती है। यीशु को पहचानने के लिए पवित्र आत्मा की ज्योति की जरूरत होती है। ईश्वर पर विश्वास करने के लिए पवित्र आत्मा की शक्ति की जरूरत होती है। यीशु को मनाने के लिए यीशु को अपने जीवन में स्थान देने की जरूरत होती है। परमेश्वर को अपना जीवन समर्पित करने के लिए पवित्र आत्मा की जरूरत होती है। पवित्र आत्मा की शक्ति और सामर्थ्य की जरूरत होती है पवित्र आत्मा ही हमें यीशु को प्रभु के रूप में स्वीकार करने के लिये सामर्थ्य दे सकता है। प्रभु यीशु के शिष्यों ने यीशु को अपना प्रभु माना अपना परमेश्वर माना। और उस समय से प्रभु यीशु के शिष्य परमेश्वर के शिष्य बन गए और वह प्रभु यीशु करो अपना परमेश्वर मानने लगे।

यीशु मसीह को अपना प्रभु कैसे बनाएं

हम यीशु को अपना प्रभु कैसे बनाएं कलोसी अध्याय 2 वचन 6 और 7 आपने ईसा मसीह को प्रभु के रूप में स्वीकार किया है इसलिए उन्हीं से संयुक्त होकर जीवन बिताएं। उन्हीं में आप की जड़े गहरी हो और नीव सुदृढ़ हो। संत पॉलस कहते हैं कि यदि अपने यीशु मसीह को अपने प्रभु के रूप में स्वीकार किया है तो आप यीशु मसीह से संयुक्त होके जीवन बिताएं। एक विश्वासु का जीवन यीशु मसीह से संयुक्त होकर बताया जाता है आगे संत पॉलस कहते हैं उन्हीं में आप की जड़े गहरी हो और उन्हीं में आपकी नीव सुदृढ़ हो। एक पेड़ की मजबूती उसकी जड़े होती है। और जड़ों की जितनी अच्छी पकड़ है उसके अनुसार पेड़ मजबूत रहता है। हमारे जीवन की जड़े प्रभु यीशु मसीह की गहराई जाए और वही हमारी मजबूती का कारण बने इसे हम जीवन प्राप्त करें उसी के सहारे हम जिए। एक मकान की मजबूती उसके नींव पर होती है इसीलिए यदि आप चाहते हैं आपका जीवन रूपी मकान मजबूत रहे सुदृढ़ रहे तो यीशु मसीह रूपी उस नीव को अपनाना होगा।

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