यीशु मसीह कौनसी व्यवस्था पुरी करने आए थे? Jesus message Jesus message

यीशु मसीह कौनसी व्यवस्था पुरी करने आए थे? Jesus Vachan

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यीशु मसीह कौनसी व्यवस्था पुरी करने आए थे?

पॉलस क्या कहते हैं?

बहुत सारे लोग इस बात को कहते हैं कि प्रभु यीशु मसीह व्यवस्था को नष्ट करने नहीं आए थे बल्कि व्यवस्था को पूरा करके आए थे और हम रोमियों की पत्र में पढ़ते हुए तो वहां देखते हैं कि पॉलस कहते हैं की प्रभु यीशु मसीह हमारे लिए व्यवस्था का अंत है और अब हमें व्यवस्था के अधीन नहीं है। 

बहुत सारे लोग इस बात को लेकर विचलित होते है वह यह कहते है की प्रभू येशू मसीह ने व्यवस्था को पूरा किया है उसे खत्म नहीं किया है। इसलिए व्यवस्था हमारे ऊपर लागू होती है। इस बात को हमे समझना होगा कि आखिर प्रभु यीशु मसीह ने व्यवस्था को पूरा कैसे किया? और आज मसीही विश्वासीयों को कौन सी अवस्था का पालन करना है?

यीशु मसीह ने बलिदान के द्वारा व्यवस्था को पूरा किया

जब हम मत्ती का सुसमाचार का 5 अध्याय और उसके 17 वचन को पढ़ते हैं की "यह न समझो कि मैं व्यवस्था या भविष्यवक्ताओ की पुस्तकों को लोप करने आया हुं। परंतु पूरा करने आया हूं" और हम जब पॉलस की पत्रियो को या अन्य प्रेरित की पत्रियो को पढ़ते हैं तो वहां लिखा गया है यीशु के बलिदान के द्वारा व्यवस्था अब मसीही विश्वासीयों पर लागू नहीं होती। और अब मसीही विश्वासी व्यवस्था के अधीन नहीं है।

रोमियो 6 अध्याय और वचन 14 "तुम पर मैं की प्रभुता ना होगी क्योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के अधीन हो"। और रोमियो की ही पत्री उसका 10 अध्याय और 4 वचन मे पढ़ते हैं "हर एक विश्वास करने वाले के लिए धार्मिकता के निमित्त मसीह यीशु व्यवस्था का अंत है।"

रोमियो की पत्री 7 अध्याय उसके 6 वचन के पढ़ते हैं की "परंतु जिस के बंधन में हम थे उसके लिए मरकर अब व्यवस्था से ऐसे छूट गए की लेख की पुरानी नीती पर नहीं वरन आत्मा की नई रीति पर सेवा करते हैं। यहां पॉलस कहते हैं कि यीशु व्यवस्था का अंत है। और यीशु कहते हैं कि मैं व्यवस्था नष्ट करने नहीं आया।

मत्ती अध्याय 5 वचन 17 और 18 "क्योंकि मैं तुमसे सच कहता हूं कि जब तक आकाश और पृथ्वी टल ना जाए तब तक व्यवस्था से एक मात्रा या एक बिंदु भी बिना पूरे हुए नहीं टलेगा।" तो यहां पर जब हम दोनों चीजों को पढ़ते हैं तो हम यहां कंफ्यूज हो जाते हैं। हम देखते हैं की प्रभू येशू मसीह कहते हैं एक तरफ कि मैं व्यवस्था को नष्ट करने नहीं आया मैं उसे पूरा करने आया हूं।

उधर जब हम और जब हम पॉलस की पत्रियोंको या अन्य प्रेरकों की पत्रियोंको पढ़ते हैं हमें यह बताया गया है वहा कि अब व्यवस्था लागू नहीं है। व्यवस्था के कार्यों से कोई भी धर्मी नहीं ठहरेगा, विश्वास के द्वारा धर्मी ठहरेगा तो यह इसको लेकर हम कंफ्यूज होते हैं और बहुत सारे लोग कहते हैं कि प्रभू यीशु ने व्यवस्था का अंत नहीं किया है। बल्कि व्यवस्था को पूरा किया है। तो फिर यहां पॉलस ने क्या लिखा है? पॉलस के कहने का मतलब क्या है?

और जो प्रभु यीशु मसीह ने कहा मैं व्यवस्था को पूरा करने आया हूं तो फिर आखिर इन दोनों में क्या बात समान है। इस बात को जानने के लिए जब हम बाइबल का अध्ययन करते हैं तो वहां पाते हैं कि प्रभु यीशु मसीह ने जो व्यवस्था शारीरिक थी से आत्मिक कर दिया यानी कि जो व्यवस्था शरीर के कार्यों के द्वारा इस्राएली को और यहूदियों को धर्मी ठहराती थी अब उस व्यवस्था को आत्मिक करके प्रभु यीशु मसीह ने विश्वास की धार्मिकता मे बदल के पूरा कर दिया।

जब कोई चीज पूरी की जाती है तो उसका मतलब यह होता है कि उसमें कोई चीज जुड़ना बाकी है। या यह कहें कि वह अपने आप में कुछ अधूरी है। तो क्या व्यवस्था अधूरी थी? क्या परमेश्वर ने इजरायलीयो को मनाने के लिए दी थी क्या वह अधूरी थी? जिसे यीशु मसीह पूरा करने आए थे?

जब हम रोमियो के पत्रिका 7 वां और 12 वचन को पढ़ते हैं "इसलिए व्यवस्था पवित्र है और आज्ञा भी ठीक और अच्छी है" यहां पर पॉलस व्यवस्था के बारे में कहते हैं व्यवस्था पवित्र है और आज्ञा भी ठीक है। और वचन 14 में पॉलस कहते हैं "हम जानते हैं कि व्यवस्था आत्मिक है। परंतु मैं शारीरिक और पाप के हाथ बिका हुआ हूं।" तो इन दोनों वचनों को हम पढ़ते हैं तो हम समझ जाते हैं की पॉलस यह बता रहे हैं कि जो व्यवस्था परमेश्वर ने इजरायलीयों को मानने के लिए दी थी वह अपने आप में पवित्र थी।

लेकिन जो उसको मनाने वाले लोग थे उसकी पवित्रता को अपने आप पर लागू नहीं कर पाए और उसे शारीरिक रूप से लागू करके उन कार्यों के द्वारा अपने आप को धर्मी बनाने की कोशिश करते रहे।  यही बात प्रभु यीशु मसीह कहते हैं कि जो व्यवस्था है मैं उसे पूरा करने आया हूं जो व्यवस्था शुरू से ही पवित्र थी।  लेकिन इजरायलीयोने और हमने उसे अपने शरीर के कार्यों द्वारा उसे शारीरिक कर दिया और हमारे अंदर जो आत्मिक और पवित्र व्यवस्था थी उसे आत्मिक रूप से लेकर उसे शारीरिक रूप से लिया और केवल शरीर के कामों को ही महत्व देने लगे कि हम बलि चढ़ा दे , पर्व मना दे इसी को अपनी धार्मिकता समझने लगे लेकिन जो व्यवस्था की आत्मिकता थी उसे हम भूल गए।

 उसी व्यवस्था को पूरा करने यीशु मसीह आए थे। भविष्य वक्ताओं की पुस्तकें और व्यवस्था यह दोनों अलग अलग चीज है जिन्हे प्रभु यीशु ने पूरा किया। हम पुराने नियम में देखते हैं जो व्यवस्था है वह कानून और नियम है जो निर्गमन की पुस्तकों में लिखी है जो इजरायली यों को माननी थी। और उन के अनुसार उन्हें चलना था।









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