कौन है प्रभु? आपका प्रभु कौन है? Who is jesus in hindi Jesus message

कौन है प्रभु? आपका प्रभु कौन है? Who is jesus in hindi ( Jesus Vachan )


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कौन है प्रभु? आपका प्रभु कौन है?

कौन है प्रभु?

कलोसी अध्याय 1 वचन 16 सब कुछ चाहे स्वर्ग में हो या पृथ्वी पर चाहे दृश्य हो या अदृश्य और स्वर्ग के दुतों की श्रेणियों में उन्हीं के द्वारा शिष्ट किया गया है।  संत पॉलस ये बताना चाहते है की हमारे जीवन का केंद्र बिंदु यीशु मसीह है। एक विश्वासू के जीवन का केंद्र बिंदु यीशु मसीह है। जब तक यीशु केंद्र बिंदु नहीं तब तक सब कुछ सुनिश्चित और संगठित नहीं सब कुछ सुरक्षित नहीं सब कुछ सुदृढ़ नहीं। और हमारे जीवन में समस्याएं तब उधर आती है जब हम यीशु को नजर अंदाज करते हैं या दुर्लक्षित करते हैं।

आप इस बात को जाने जब एक विश्वास के परिवार से यीशु मसीह को दुर्लक्षित किया जाता है तब परिवार में समस्याएं और संकट आ जाते हैं। लेकिन जब प्रभु यीशु मसीह को केंद्र बनाया जाता है जब प्रभु हमारे केंद्र है तब तक सब कुछ सुरक्षित और संगठित रहता है। प्रभु यीशु को ईश्वर मानने के बाद यीशु को अपने जीवन का केंद्र बनाए और यीशु के वचनों के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करें। प्रभु का मतलब है मालिक, प्रभु का मतलब है नियंत्रित करने वाला, प्रभु का अर्थ है चलाने वाला।

आपका प्रभु कौन है?

पुनर्जीवित यीशु से मिलने के बाद प्रभु यीशु के शिष्यों के लिए यीशु ही संचालित करने वाला नियंत्रित करने वाला मालिक और प्रभु बने। क्या हमारा मालिक प्रभु यीशु है? हमारा प्रभु कौन है? क्या हमने प्रभु का स्थान पैसों को दिया है? क्या हमने प्रभु का स्थान संपत्ति को दिया है? क्या हमने प्रभु के स्थान अपने नाम और अपने अधिकार को दिया है? प्रभु का स्थान मनुष्य को दिया है? यह सवाल हमारे सामने खड़े होते हैं। कौन हमें संचालित करता है। कौन हमें नियंत्रित करता है? कई लोगों के लिए यीशु मालिक नहीं है, प्रभु नहीं है बल्कि नौकर है। वह लोग जब आवश्यकता होने पर नौकर को बुलाया जाता है वैसे आवश्यकता होने पर प्रभु यीशु को पुकारते हैं। कभी-कभी हम प्रभु यीशु मसीह को हमारे जीवन में ऐसा ही स्थान देते हैं।

आवश्यकता होने पर हम यीशु मसीह को पुकारते हैं। और हमारी आवश्यकता पूर्ण होने पर हम प्रभु यीशु हमारे जीवन से दूर करते हैं। यानी हम प्रभु यीशु मसीह को नौकर का स्थान देते हैं। यीशु को हमारे जीवन का केंद्र बिंदु करना आवश्यक है। यीशु को हमारे जीवन का मालिक और प्रभु बनाना आवश्यक है। और उसमें हमारी मुक्ति है। संत पॉलस हमे बताना चाहते हैं सब कुछ उन्हीं के के द्वारा और उन्हीं के लिए बनाया गया है।

क्या धन आपका प्रभु है?

यीशु मसीह को सबको अपना केंद्र बिंदु बनाना चाहिए। हमारे जीवन में कई प्रकार की समस्याएं आती है इसका मुख्य कारण यह है कि हमने यीशु मसीह को हमारे जीवन का केंद्र बिंदु नहीं बनाया है। केवल प्रभु यीशु मसीह हमारे जीवन को संगठित और नियंत्रित रख सकते हैं। जब हम यीशु मसीह को हमारे जीवन से हटाते हैं तब हमारे जीवन में असंतुलन आता है। जब एक विश्वासी के जीवन से प्रभु यीशु मसीह हटाया जाता है उसके जीवन में संतुलन आ जाता है और कई प्रकार की समस्या जाती है। और उसने फिर एक बार संतुलन लाने के लिए हमें प्रवेश मसीह को अपना केंद्र बिंदु बनाना होगा।

क्या हमने प्रभु यीशु मसीह को अपना केंद्र बिंदु बनाया है? या फिर हमने अपने पैसे को या अपनी संपत्ति को या फिर किसी अन्य व्यक्ति को या मनुष्य को प्रभु यीशु मसीह का स्थान दिया है? हमारे जीवन में बदलाव की जरूरत है। हमारे ह्रदय का नवीनीकरण करना जरूरी है। परमेश्वर को अपने ह्रदय में बिठा कर उसके वचनों पर चलना जरूरी है। बाइबल में हम पढ़ते हैं प्रभु यीशु मसीह येरूसलम मंदिर में प्रवेश किए और उन्होंने देखा  की  येरूसलम मंदिर में व्यापार चल रहा है। उनको क्रोध आया उन्होंने सबको वहां से भगाया। उन्होंने कहा कि मेरे पिता का नाम है प्रार्थना का भवन है।

हमें भी अपने जीवन में ऐसा नवीनीकरण करना चाहिए। अन्य चीजों को महत्त्व ना देते हुए प्रभु यीशु मसीह का अपने जीवन में महत्त्व देना चाहिए। एक नौकर के तरह प्रभु यीशु मसीह को नहीं समझना चाहिए। कई सारे लोग प्रभु यीशु मसीह की जगह खुद को ही रख देते हैं वह प्रभु की इच्छा से नहीं खुद की इच्छा से चलते है। प्रभु यीशु मसीह जब पृथ्वी पर थे तब वह कहते थे कि हे पिता तेरी इच्छा पूरी हो। हमें प्रभु की इच्छा से चलना चाहिए तभी हम कह सकते हैं की यीशु हमारे प्रभु है। हमें प्रभु यीशु मसीह को अपने परिवार का मालिक बनाना चाहिए तभी यीशु हमारे परिवार को नियंत्रित करता है।